कवर्धा वन मंडल में साल हार्टवुड बोरर नियंत्रण पर प्रशिक्षण आयोजित

कवर्धा। कवर्धा वन मंडल में 28 अप्रैल 2026 को भारतीय वन शिक्षा संस्थान (ICFRE-TFRI), जबलपुर के सहयोग से ‘साल हार्टवुड बोरर (Hoplocerambyx spinicornis) के समन्वित प्रबंधन’ विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में वन मंडल के क्षेत्रीय वन अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि साल हार्टवुड बोरर छत्तीसगढ़ के साल वनों के लिए अत्यंत हानिकारक कीट है, जो पेड़ों के तनों में सुरंग बनाकर हार्टवुड को नुकसान पहुंचाता है। इससे लकड़ी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वन उत्पादकता में गिरावट आती है। हाल के समय में कवर्धा वन मंडल के साल वनों में इस कीट का प्रकोप बढ़ने से वन विभाग के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

कार्यक्रम में कीट के जीवन चक्र, पारिस्थितिकी, मौसमी प्रकोप के पैटर्न तथा प्रभावित वृक्षों की पहचान से संबंधित विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही ट्रैप-ट्री तकनीक एवं अन्य वैज्ञानिक प्रबंधन उपायों के माध्यम से नियंत्रण के तरीकों को भी समझाया गया। क्षेत्रीय प्रदर्शन के जरिए प्रतिभागियों को कीट के विभिन्न जीवन चरणों की पहचान, प्रभावित वृक्षों का वर्गीकरण और प्रभावी नियंत्रण उपायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक एसएफआरटीआई रायपुर तपेश कुमार झा, आईसीएफआरई-टीएफआरआई जबलपुर की निदेशक डॉ. नीलू सिंह, मुख्य वन संरक्षक दुर्ग सर्कल श्रीमती एम. मर्सी बेला, वन मंडलाधिकारी कवर्धा निखिल अग्रवाल सहित टीएफआरआई के वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वन विभाग के अनुसार, इस प्रशिक्षण के माध्यम से कवर्धा वन मंडल साल वनों को इस कीट के प्रकोप से बचाने के लिए प्रभावी रणनीति विकसित कर सकेगा। इससे न केवल वनों के स्वास्थ्य एवं उत्पादकता में सुधार होगा, बल्कि लकड़ी की गुणवत्ता बढ़ेगी और आर्थिक नुकसान में भी कमी आएगी।




