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कवर्धा: 1975 में लगे आपातकाल को लेकर विधायक भावना बोहरा ने कहा तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भारत की आत्मा, लोकतंत्र पर प्रहार किया था हम कभी भुला नहीं सकते उस दिन को

कवर्धा: 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश में आपातकाल घोषित किये जाने के विरोध में आज जिला प्रशासन कबीरधाम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पंडरिया विधायक भावना बोहरा शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने आपतकाल की 50वीं बरसी पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मशील सेनानियों व मीसाबंदियों  हरीश लुनिया, कुमारी देवी सोनी और  विजय यादव  को सम्मानित किया। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन व प्रेस की आज़ादी पर लगाए गए प्रतिबंध के प्रति विरोध प्रकट किया।

इस अवसर पर भावना बोहरा ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 1975 से 77 तक लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उस दौरमें इंदिरा सरकार ने संविधान की मूल भावना को दरकिनार कर लोकतंत्र के आत्मा, संवैधानिक संस्थाओं, प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिक अधिकारों पर आघात किया। आपातकाल का कालखंड भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कलंक के टीके की तरह हैं। कांग्रेस ने आपातकाल की आड़ में भारत की आत्मा पर प्रहार किया। यह कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र को कुचलने की साजिश थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान को नजरअंदाज किया, जनता के मौलिक अधिकार छीने, और असहमति की हर आवाज को जेल में बंद कर दिया। प्रेस की आजादी पर ताले लगाए गए, विपक्ष के नेताओं को कैद किया गया, और आम नागरिक भय के साये में जीने को मजबूर हुआ। कांग्रेस का यह कदम सत्ता की लालच और तानाशाही की मानसिकता का प्रतीक है। जब उनकी सत्ता पर सवाल उठे, तो उन्होंने जनता को ही दबाने की कोशिश की। भ्रष्टाचार और कुशासन की आलोचना को दबाने के लिए आपातकाल थोपा गया। लेकिन वे भूल गए कि भारत की जनता गुलामी की जंजीरें तोड़ना जानती है। जयप्रकाश नारायण , स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी और लाखों देशवासियों ने इस अंधेरे के खिलाफ आवाज उठाई। सड़कों पर उतरे नौजवानों ने साबित किया कि लोकतंत्र किसी एक पार्टी का बंधक नहीं, बल्कि जनता की ताकत है।

भावना बोहरा ने कहा कि यह कोई साधारण निर्णय नहीं था; यह था एक तानाशाही थी, जहां सत्ता की भूख ने जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की। यह देश केवल सत्ता का मोह नहीं, बल्कि संघर्ष और साहस की कहानी है। एक वह युग था जब लोगों की आवाज को कुचला गया और आज  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में जनता की आवाज को सुना जा रहा है। मोदी  के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधार, सामाजिक कल्याण और अवसंरचना विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है।”मेक इन इंडिया” और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत किया है। किसान कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाओं ने समावेशी विकास को बढ़ावा दिया है। धारा 370 हटाना, नई शिक्षा नीति, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, आज़ादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना, तीन तलाक कानून, वक्फ बोर्ड अधिनियम और जापान को पीछे कर आज भारत, विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। मोदी सरकार की इन उपलब्धियों ने विकसित भारत की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और वैश्विक नेतृत्व के साथ, हम 2047 तक स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में एक समृद्ध और समावेशी भारत का सपना साकार करेंगे।

इस अवसर पर कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, भाजपा जिला अध्यक्ष  राजेंद्र चंद्रवंशी, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  रोशन दुबे,  दीपा धुर्वे,  राजेश्वरी धृतलहरे, जिला भाजपा कोषाध्यक्ष  रूपेश जैन, जिला प्रशासन कबीरधाम के जिलाधीश  गोपाल वर्मा, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अजय त्रिपाठी, वन मंडलाधिकारी  निखिल अग्रवाल, सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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