दो किलोमीटर पैदल घिसलते चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचा दिव्यांग संघ के दर्जनों कार्यकर्ता, पुलिस ने गेट में रोका, मुख्यमंत्री के नाम 6 सूत्रीय मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन।

कवर्धा: छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ का पिछले 60 दिवसीय आंदोलन राजधानी रायपुर में जारी है. इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक दिन जिला प्रशासन को ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग रख रहे है, फिलहाल अभी आंदोलन कारियों के मांग पर शासन और प्रशासन ने विचार नहीं किया है। इसी कड़ी में सोमवार को छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के दर्जनों कार्यकर्ता 6 सूत्रीय मांगों को लेकर कवर्धा के सिग्नल चौक से डीएम कार्यालय तक दो किलोमीटर तक पैदल घिसलते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे लेकिन सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कलेक्ट्रेट में दाखिल होने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला कार्यालय के गेट पर ही बैठ गए और शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, घंटों बाद प्रशासन की ओर से नयाब तहसीलदार पहुंचे और ज्ञापन लिया।

संघ का आरोप है की छत्तीसगढ़ प्रदेश के अलग-अलग विभागों में 150 से अधिक अधिकारी कर्मचारी फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं. जिनका प्रमाण पत्र की जांच कर उन पर कारवाई की जाए लेकिन कई बार संघ की ओर से आवेदन दिया जा चुका है लेकिन उनपर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
क्या है मांग
.समस्त विभाग ने दिव्यांग कोटे के बैकलॉग पदो पर विशेष भर्ती अभियान विज्ञापन जारी किया जावे।
. दिव्यांगजनो दिव्यांग वंदन योजना बनाकर प्रतिमाह 5000 रू मासिक पेंशन दिया जावे। बी.पी.एल. की बाध्यता खत्म किया जावे।
. 21. वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित दिव्यांग युक्ती को महतारी बंदन योजना में
5000 स मासिक पेंशन के अलावा अलग से दिया जाये।
.शासकीय पदो पर नियुक्त दिव्यांग शासकीय अधिकारियो-कर्मचारियों को पदोन्नती पर 3 प्रतिषत आरक्षण का प्रावधान है जिसे कोई विभाग पालन नहीं कर रहा है। शासन के निर्धारित मापदंड अनुसार 3 प्रतिशत पदो पर 1.11.2016 से पदोन्नत पदो की गणना कर तत्काल उसके 3 प्रतिशत पर तत्काल पदोन्नती प्रदान करें।
.कोरोना काल के पूर्व के स्वरोमजार हेतू दिव्यांगजनों के द्वारा लिए गए निःशक्त विस्त निगम के कर्ज माफ किया जावे। कोरोना के पूर्व दिव्यांगजनों के द्वारा लिए गए लोन को माफ किया जावे इन सभी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
.प्रशासन ने दिव्यांग संघ के ज्ञापन को शासन स्तर का बताते हुए मुख्यमंत्री को भेजने की बात कही है।




